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शुक्रमेह/ धातु रोग/  Spermatorrhea/ वीर्य का पतला हो जाना:

(1) ‘जब भी गर्लफ्रेंड से बात करता हूँ, मेरा वीर्य निकल जाता है’, (2) सर जैसे ही मैं adult content देखता हूँ, देखते ही देखते मेरा वीर्य अपने आप निकल जाता है’, (3) जैसे ही लड़की के बारे में सोचता हूँ या सेक्स के बारे में सोचता हूँ, लिंग से चिपचिपा सा पदार्थ निकलने लगता है (4) ‘ऐसा लगता है जैसे हर समय वीर्य बूँद बूँद करके निकलता रहता है’.

दोस्तों ये कुछ ऐसी बातें हैं जो मैं आये दिन अपनी क्लीनिकल प्रैक्टिस में सुनता हूँ. रोज़ आने वाले मामलों को देखकर ऐसा लगता है जैसे जवान और कम उम्र लड़कों के बीच इस बीमारी ने महामारी का रूप ले लिया है.
आजकल मोबाइल एक आम बात है और लड़के लड़कियां मोबाइल पर बात करते ही हैं, इसलिए सबसे कॉमन जो सुनने को मिलता है वह है: गर्लफ्रेंड से बात करते हुए वीर्य का निकल जाना.
लड़के जब इस धातु रोग से परेशान हो जाते हैं तो नीम हकीमों के चक्कर में पड़ जाते हैं, जहाँ उन्हें सिवाय पैसे बर्बाद करने के अलावा कुछ नहीं मिलता.
इसीलिए ज़रूरी है कि हम धातु रोग और इसके उपचार के बारे में जानें.

हम इस रोग के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे और इसका आयुर्वेदिक, पूरी तरह से प्राकृतिक एवं देसी लेकिन 100 % कारगर और साइड इफेक्ट्स से फ्री इलाज आपको बताएँगे.
तो सबसे पहला सवाल: आखिर यह है क्या? क्या इस बीमारी का कोई नाम भी है?
आओ जानें.

दोस्तों इसे सामान्य भाषा में धातु रोग या धात रोग कहा जाता है. आयुर्वेद में इसे शुक्रमेह कहा गया है. मॉडर्न मेडिकल साइंस इसे spermatorrhea कहता है. कई लोग इसे वीर्य का पतला हो जाना भी कहते हैं.

यह शीघ्रपतन से ही मिलता जुलता रोग है. शीघ्रपतन के आयुर्वेदिक इलाज के लिए यहाँ पढ़ें.

धातु शब्द का मतलब है धारण करना, यानी वे पदार्थ जो मिलकर हमारा शरीर बनाते हैं. आयुर्वेद के अनुसार हमारा शरीर सात धातुओं से मिलकर बना माना गया है, जैसे: रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा और शुक्र. शुक्र धातु ही वीर्य का निर्माण करती है.

धातु रोग का कारण (Causes Of Spermatporrhea):

मॉडर्न मेडिकल साइंस (allopathy) के मुताबिक़ वीर्य (semen) का ज़्यादातर हिस्सा हमारे मसाने (urinary bladder=मूत्राशय) के पीछे स्थित दो ग्रंथियों (glands) सेमिनल वेसिकल्स (seminal vesicles) और मसाने के नीचे स्थित एक ग्रंथि प्रोस्टेट ग्लैंड (prostate gland) में बनता है. इन तीनों (2 सेमिनल वेसिकल्स और 1 प्रोस्टेट) का स्राव ही वीर्य का बड़ा भाग बनाता है. उत्तेजना के समय यह स्राव, अंडकोषों के अंदर मौजूद दो टेस्टिस (Testes) से आये स्पर्म्स (sperms) के साथ मिलकर वीर्य के रूप में बाहर निकलता है.
ऑर्गैज़म (orgasm) यानि चरम सुख के साथ वीर्य का निकलना एक बहुत ही जटिल प्रक्रिया होती है जिसमे हमारा नर्वस सिस्टम(nervous system), कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम (cardiovascular system) और स्मूथ मसल (smooth muscles=वे मांसपेशियाँ जिनका कंट्रोल हमारे बस में नहीं होता है) हिस्सा लेते हैं.

इसी हिसाब से धातु रोग के दो मुख्य कारण माने गए हैं:

  • लिंग की मांस पेशियों का कमज़ोर पड़ जाना या वीर्य का सामान्य से अधिक पतला हो जाना,
  • नर्वस सिस्टम का सही काम न करना.

ये दोनों ही विकार (problems) निम्न कारणों से पैदा होते हैं.

  • शारीरिक दुर्बलता (physical weakness): शरीर अगर कमज़ोर होता है तो शरीर के सभी अंग भी कमज़ोर होते हैं जिनमे मांसपेशियां भी शामिल हैं.
  • अधिक हस्तमैथुन करना (excessive masturbation),
  • सेक्स के बारे में सोचते रहना,
  • अश्लील videos देखना, अश्लील कहानिया  पढना या चित्र देखना 
  • इच्छा शक्ति की कमी (lack of will power).

शुक्रमेह से पैदा होने वाली बीमारियाँ (Complications Of Spermatorrhea):

  • शुक्रमेह देखा जाए अपने आप में कोई ख़ास नुकसान नहीं पहुँचाता है, पर इसकी वजह से जो और परेशानियाँ पैदा होती है वे जीवन को नर्क बना देती है.
  • शुक्रमेह से शरीर में दुर्बलता बढ़ती चली जाती है और इस प्रकार से दुर्बलता और शुक्रमेह मिलकर एक दुष्चक्र (vicious cycle) बना लेते है: दुर्बलता से शुक्रमेह > शुक्रमेह से और दुर्बलता > दुर्बलता से और अधिक शुक्रमेह ,
  • चेहरे पर तेज बिलकुल ख़त्म हो जाता है और 20 की उम्र में लड़का 30-40 का लगने लगता है,
  • बदन थका थका सा रहता है,
  • मेहनत का कोई काम, एक्सरसाइज (exercise), व्यायाम करने से एकदम थकान हो जाती है,
  • याददाश्तकमज़ोर हो जाती है,
  •  कमर के निचले हिस्से में दर्द रहने लगता है,
  •  सेक्स की इच्छा (libido) धीरे धीरे ख़त्म होने लगती है,
  • लिंग पूरी तरह से खड़ा नहीं हो पाता (imperfect erection),
  • और आखिर में नपुंसकता (impotency) आ जाती है यानि यौनशक्ति (ability to hold a sustainable erection) पूरी तरह से ख़त्म हो जाती है.

तो ये तो हुए शुक्रमेह के कारण. अब हम चर्चा करेंगे कि शुक्रमेह यानि धातु रोग का क्या इलाज है?
आयुर्वेद में शुक्रमेह की प्रबलता के हिसाब से कई उपचार उपचार सुझाये गए है.

सामान्य रूप से शुक्रमेह का आयुर्वेदिक उपचार

1.बला (Sida cordifolia)

बला एक बहुवर्षीय (perennial) पौधा है जिसका बोटैनिकल नाम Sida cordifolia है. इसकी कई जातियाँ (species) होती हैं जैसे अतिबला, नागबला, महाबला. बला बेहद बलवर्धक होती है. बला की जड़ का शुक्रमेह में इस्तेमाल बीमारी को जड़ से उखाड़ देता है.

2.तालमखाना (Euryale ferox)

तालमखाना (fox nut) जिसका बोटैनिकल नाम Euryale ferox है. तालमखाने को वीर्य की मात्रा को बढ़ाने वाला और पुष्ट करने वाला यानि गाढ़ा करने वाला माना गया है.

3.शतावरी (Indian asparagus)

शतावरी यानि इंडियन ऐस्पैरागस (Indian asparagus). शतावरी नपुंसकता को दूर करती है और यौनशक्ति बढ़ाती है.

4.गोखरू (Tribulus terrestris)

गोखरू जिसे इंग्लिश में puncture vine कहते हैं और जिसका बोटैनिकल नाम Tribulus terrestris है को आयुर्वेद में वीर्यवर्धक, शुक्रवर्धक, मूत्र मार्ग को शीतलता प्रदान करने वाला माना गया है.

चूर्ण बनाने का तरीका (How To Prepare The Powder):

बला की जड़, तालमखाना, शतावरी की सूखी जड़ और गोखरू के बीज वज़न के हिसाब से बराबर मात्रा में लेकर पीस लें. इस चूर्ण को दिन में दो बार (सुबह और शाम) शहद और दूध के साथ लें.
यह उपचार वीर्य को गाढ़ा करेगा, लिंग की मांसपेशियों को ताकत देगा, स्पर्म की संख्या बढ़ाएगा और एक माह के भीतर आप शुक्रमेह को भूल जाएंगे.
ऊपर बताये गए नुस्खे को अगर आप चन्दनसाव के साथ इस्तेमाल करेंगे तो फायदा जल्दी होगा.

इन बातों का भी रखें ध्यान:

1. हस्तमैथुन न करें,
2. सेक्स के बारे में न सोचें,
3. इच्छा शक्ति विकसित करें. इच्छा शक्ति बढ़ाने के लिए कुछ विशेष आसनों पर हमारा लेख पढ़ना न भूलें.

पुरुषों में शुक्राणुओं(sperms) की कमी के इलाज के लिए यहाँ पढ़ें.

नोट: डायबिटीज और ब्लड प्रेशर के रोगी बिना आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह के बिना यह नुस्खा इस्तेमाल न करें.