Swamala Chyawanprash Review- Kya ye dusre chyawanprash se kayi guna behtar hai?

Swamala Chyawanprash Review- Kya ye dusre chyawanprash se kayi guna behtar hai?

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आयुर्वेद का हमे रोगमुक्त रखने में अत्यधिक महत्व है और विभिन्न जड़ी बूटियों और रसायनों के सही इस्तेमाल से बनाये गए आयुर्वेदिक नुस्खे हमारी रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढाने में काफी सहायक होते हैं. सभी आयुर्वेदिक औषधियों में च्यवनप्राश सबसे लोकप्रिय है जिसको general health को maintain रखने के लिए देश विदेश में बड़े पैमाने पर प्रयोग किया जाता है. च्यवनप्राश प्राचीनकाल से चला आ रहा एक आयुर्वेदिक नुस्खा है जिसका उल्लेख महाभारत जैसे प्राचीन ग्रंथो में भी मिलता है. च्यवनप्राश को सबसे पहले अश्विन बन्धु जो कि देवताओं के राजवेद्य (royal herbalist) थे, द्वारा ऋषि च्यवन के लिए उनके आश्रम में बनाया गया था और इसी लिए इसका नाम च्यवनप्राश हुआ.

च्यवनप्राश कोई औषधि थी ये तो पता था लेकिन इसका formula सबसे पहले चरक संहिता नाम की पुस्तक (book) में पाया गया. तब से अब तक च्यवनप्राश को घरों में और बड़ी छोटी आयुर्वेदिक कम्पनियाँ बना रही हैं और सबने अपने अपने हिसाब से इस नुस्खे को modify किया है.

 

जी हाँ स्वामला दुसरे chyawanprashon से बेहतर है और ये रहा मेरा personal observation

Swamala found many times more effective on my patients – read the case

डाबर, वैद्यनाथ, झंडू, पतंजलि, हिमालया, हिमानी जैसी बड़ी बड़ी बहुराष्ट्रिय (international) कंपनिया इस नुस्खे के परिष्कृत preparations बेंच रही हैं और सभी अपनी अपनी जगह अच्छा काम करते हैं. हाल ही में मेरे पास एक मरीज़ आया और उसने मुझसे कहा कि डॉक्टर साहब मै अक्सर बीमार पड़ता रहता हूँ और आये दिन मुझे नजला बुखार खांसी परेशां करती रहती है और मुझे भूक भी नहीं लगती. मैंने सबसे पहले तो उसको अपना लाइफस्टाइल सुधरने की सलाह दी और उचित व्यायाम करने के लिए कहा. साथ में मैंने उसको वैद्यनाथ केसरी कल्प prescribe किया और १५ दिन बाद वापस आने के लिए कहा.

वो मरीज़ १५ दिन बाद आया और उसने कहा कि डॉक्टर साहब मैंने ये दवाई बराबर खायी है इससे मेरे अन्दर चुस्ती फुर्ती तो आई है और जुकाम की शिकायत भी कम है, लेकिन मुझे भूक अभी भी कम लग रही है. मैंने उसको dhootpapeshwar स्वामला च्यवनप्राश prescribe किया और १५ दिन बाद फिर से मिलने के लिए कहा.

वो मरीज़ 20 दिन बाद मेरे क्लिनिक पर आया और काफी खुश नज़र आ रहा था. उसने मुझसे बताया कि अब मुझे भूक भी बहुत अच्छी लग रही है, और इन 20 दिनों में मै बिलकुल भी बीमार नहीं हुआ. जब वो पहली बार मेरे पास आया था तो उसका वज़न ४५ किलोग्राम था और दूसरी बार जब आया तो भी ४५ ही किलोग्राम था लेकिन इसबार जब मैंने उसका वज़न किया तो उसका वज़न ४८ किलो ग्राम पाया. इससे साफ़ हो गया की स्वामला ने उसके शरीर में  वात, पित्त और कफ के बिगड़े हुए संतुलन को सुधारा है. जिससे उसका यकृत (liver) और पाचन तंत्र ठीक से कम करने लगे. स्वामला के इतने सकरात्मक प्रभाव का देखते हुए मैंने उसको एक महीने तक फिर से स्वामला खाने के लिए कहा और फिर से एक महीने बाद मिलने को कहा. आपको यकीन नहीं होगा की एक महीना बाद जब वो आया तो उसने कहा की अब वो बिलकुल बीमार नहीं पड़ता है, उसकी भूक पहले से काफी बढ़ गयी है, नींद भी अच्छी आती है और बदन चुस्त रहता है. मैंने उसका वज़न किया तो इस बार वज़न ५३ किलोग्राम था. मैंने  उसको स्वामला की khurak आधी करने के लिए कहा और साथ में gym करने की सलाह दी ताकि भूक बढ़ने की वजह से शरीर पर चर्बी जमा न हो सके.

उस दिन के बाद से मैंने अनगिनत मरीजों को स्वामला लिखा और 80 परसेंट मरीजों को इससे दुसरे chywnprashon की तुलना में कई गुना ज्यादा फायदा हुआ. 

ऐसा क्या खास है स्वामला में जो इसको दूसरे च्यवनप्राश से बेहतर बनाता है?

How Swamala is better than other leading chyawanprash

स्वामला भी प्राचीन आयुर्वेदिक औषधि च्यवनप्राश का एक रूपांतरण है जिसमे सोना, चांदी और दूसरी कुछ खास धातुओं की भस्म का इस्तेमाल किया गया है. दूसरी बात ये है कि दूसरी कई कम्पनियाँ सोना चांदी के नाम पर अपने च्यवनप्राश बेंचती हैं लेकिन असल में उनमे सोना चांदी होता ही नहीं है. स्वामला dhootapeshwar कंपनी द्वारा बनाया जाता है और कई laboratory tests में ये साबित हो चुका है कि असलियत में ही स्वामला में सोना चांदी की भस्म होती है और इसकी मात्रा एक स्वस्थ व्यसक व्यक्ति के लिए सुरक्षित होती है. स्वामला की उच्च गुणवत्ता और ग़ज़ब का formula ही इसके इतने इफेक्टिव होने का राज़ है.

स्वामला की कितनी खुराक आपको रोजाना लेनी चाहिए?

What should be the dosage of Swamala for different age groups

अगर आपकी उम्र 18 साल से ज्यादा है तो आपको एक बड़ा चम्मच सुबह और रात में दूध के साथ लेना चाहिए. अगर आपकी उम्र 18 से कम है तो एक छोटा चम्मच सुबह दूध के साथ लेना उचित है.

क्या स्वामला निरंतर लिया जा सकता है?

Is it okay to intake Swamala as a regular diet?

मेरे हिसाब से आपको लगभग दो महीना स्वामला लेकर उसके बाद एक महीना तक छोड़ देना चाहिए और अपने लाइफस्टाइल को सुधारकर, गलत खानपान से बचकर और उचित व्यायाम करके ही अपने स्वास्थ्य को संतुलित रखने की कोशिश करनी चाहिए. अगर किसी वजेह से फिर से आपकी सेहत ख़राब होने लगती है तो दोबारा स्वामला लेना शुरू कर सकते हैं. लेकिन मै बस यही कहना चाहूँगा की स्वामला हो या कोई भी दूसरी ऐसी दवा जो आपके बिगड़े स्वास्थ्य को सुधारने में मदद करती है उसको अपनी रोज़मर्रा की खुराक का हिस्सा बनाने से बचना चाहिए. क्यूंकि सही खानपान, सही लाइफस्टाइल और अवसाद/तनावरहित जीवन ही स्थायी रूप से आपको स्वस्थ रख सकते हैं.

क्या स्वामला पुरुष कामशक्ति को भी बढाता है?

Does Swamala improve male sex power?

अगर आप कम बीमार पड़ेंगे तो सीधी सी बात है आपके सभी वाइटल ओर्गंस जैसे लीवर, किडनी और हार्ट सही काम करेंगे और आपका नर्वस सिस्टम भी शक्तिशाली बनेगा. तो हाँ मै यही कहूँगा कि स्वामला आपकी वैवाहिक जीवन को भी बेहतर बना सकता है. और sexual weakness की दशा में आपको स्वामला लेना चाहिए.

स्वामला का क्या कोई नुकसान भी है.

What is the sidedeffects of Swamala

अगर आप किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं जैसे diabetes, दिल की बीमारियाँ, थाइरोइड, लीवर disorders या दूसरी कोई ऐसी बीमारी तो बिना चिकित्सक की सलाह के स्वामला या कोई भी दवा नहीं लेनी चाहिए चाहे वो देसी ही क्यों न हो.

स्वामला कहाँ से खरीदें

Where to buy Swamala?

स्वामला आप हमारे ऑनलाइन स्टोर से भी आर्डर कर सकते हैं. इसके अलावा दुसरे ऑनलाइन स्वामला उपलब्ध है.

This article is written by Dr. Shamoon Siddiqui a registered ayurvedic physician authorize by Indian government.

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दवा को इस्तेमाल करने का तरीका, खुराक और समय, Dosage, How to use


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Swamala Chyawan… से सम्बंधित कुछ सवाल जवाब, Questions related to Medicine


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पीलिया का आयुर्वेदिक विधि से जड़ से सफाया कैसे करें/Ayurvedic Treatment For Jaundice

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Jaundice: Causes And Treatment

पीलिया: कारण और निवारण

दोस्तों, गो क्यूरेबल में आपका एक बार फिर से स्वागत है.

आज हम बात करेंगे पीलिया यानी jaundice रोग की.

दोस्तों इस आर्टिकल को ध्यान से पढ़िए. इस आर्टिकल के ज़रिये हम आपको बताएँगे कि जॉन्डिस (jaundice) यानी पीलिया रोग कैसे होता है, इस रोग को पहचानने के लिए कौन सी जांचें (investigationa) कराई जानी चाहिए, आधुनिक मेडिकल साइंस (Modern Medical Science) में पीलिया का क्या इलाज है और सबसे ख़ास बात यह कि पीलिया का आयुर्वेद में क्या उपचार है.

What Is Jaundice? पीलिया क्या है?

पीलिया असल में एक स्थिति है, एक लक्षण है और अपनेआप में एक रोग नहीं है बल्कि किसी और रोग के कारण पीलिया पैदा होता है. पीलिया में त्वचा और स्क्लेरा (sclera) (आंख का बाहरी सफ़ेद हिस्सा) का रंग पीला पड़ जाता है. पीलिया को इंग्लिश में जॉन्डिस (jaundice) कहते हैं जोकि फ्रेंच भाषा के शब्द से बना है और इसका मतलब ‘पीला रंग’ होता है. मेडिकल की ज़बान में जॉन्डिस के लिए इक्टेरस (icterus) शब्द प्रचलित है और इसका मतलब भी ‘पीला रंग’ ही होता है.

हमारे शरीर में लगातार नयी रेड ब्लड सेल्स (red blood cells) बनती रहती हैं और पुरानी रेड ब्लड सेल्स को स्प्लीन (spleen = तिल्ली) में उनके घटकों (constituents)) में तोड़ा जाता है ताकि नयी आरबीसी (RBC) बनाने में उनका इस्तेमाल किया जा सके. RBC के इसी विघटन (degradation) से बिलिरुबिन (bilirubin) बनता है. यह बिलिरुबिन लीवर (liver) और पित्त (bile) के ज़रिये मल (faeces) के साथ शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है. जब किसी कारण से बिलिरुबिन या तो ज़्यादा मात्रा में बनने लगता है या शरीर से बाहर नहीं निकल पाता है तो यह बिलीरुबिन खाल में जमा होने लगता है और शरीर का रंग पीला दिखाई देने लगता है और पीलिया रोग बन जाता है. चूंकि यह बिलीरुबिन के खून में बढ़ जाने की वजह से होता है इसलिए इसे हाइपरबिलिरूबीनीमिया (hyperbilirubinemia) भी कहते हैं.

Causes Of Jaundice: पीलिया किस वजह से होता है?

कारणों के आधार पर पीलिया तीन तरह का होता है:

1. प्रि-हिपेटिक पीलिया (Prehepatic Jaundice)
इस प्रकार के पीलिया में जिगर (यकृत = लिवर ) तो ठीक काम कर रहा होता है लेकिन किसी वजह से आरबीसी का विघटन ज़्यादा होने लगता है
जैसे- गुर्दे के रोगों में,  तिल्ली (spleen) का बढ़ जाना (splenomegaly) वग़ैरा

2. हिपेटिक पीलिया (Hepatocellular Jaundice)

हिपेटिक जॉन्डिस में लीवर सही काम नहीं करता है जिस वजह से बिलीरुबिन शरीर से बाहर नहीं निकल पाता है.
जैसे- हेपेटाइटिस (hepatitis) रोग में,  अल्कोहल के ज़्यादा इस्तेमाल से

3. पोस्ट-हिपेटिक पीलिया (Posthepatic Jaundice)

जब लीवर भी सही काम कर रहा हो और ब्लड में आरबीसी के टूटने की दर भी सामान्य हो लेकिन बाइल डक्ट (bile duct) में या बिलियरी सिस्टम (biliary system) में कहीं रुकावट होने की वजह से बिलीरुबिन आंत (intestine) में नहीं जा पाता और मल की साथ बाहर नहीं निकल पाता और शरीर में जमा होने लगता है. जैसे-  पित्त की थैली (gall bladder)की पथरी, बिलियरी सिस्टम या पैंक्रियास का कैंसर

Investigations: जॉन्डिस की जांच: 

यूँ तो जॉन्डिस की पहचान त्वचा (skin) और आँख के स्क्लेरा (आँख की सफेदी) के पीले रंग को देखकर भी की जाती है लेकिन जॉन्डिस का स्टैंडर्ड टेस्ट ब्लड में बिलिरुबिन की मात्रा के ज़रिये किया जाता है.
एक स्वस्थ व्यक्ति के 100 मिलीलीटर खून में बिलीरुबिन का सामान्य लेवल 0.5 से 1.5 मिलीग्राम होता है, जब किसी व्यक्ति के खून में यह लेवल 1.5 मिलीग्राम से ज़्यादा बढ़ा हुआ पाया जाता है तो उस व्यक्ति को पीलिया से पीड़ित माना जाता है.

यहाँ मैं फिर कहना चाहूँगा कि पीलिया खुद में कोई रोग नहीं है बल्कि किसी और रोग से पैदा होने वाला एक लक्षण है.

Jaundice In Ayurveda: पीलिया का आयुर्वेदीय मत:

पीलिया को आयुर्वेद में कामला कहा गया है. कामला को रक्तज और पित्तज माना गया है. आयुर्वेद में कामला (jaundice) को पाण्डु रोग (anemia) का कम्प्लीकेशन (complication) माना गया है. कामला के अन्य रूप जो आयुर्वेद के ग्रंथों में मिलते हैं: कुम्भ्काम्ला, हलीमक, लाघरक, पानकी, लोढर आदि.

Ayurvedic Treatment For Jaundice: पीलिया का आयुर्वेदिक उपचार:

यहाँ यह बात कहना ज़रूरी है कि पीलिया की पुष्टि हो जाने पर तात्कालिक स्वास्थ्यय लाभ एवं सिम्पटोमैटिक रिलीफ (symptomatic relief) के लिए मॉडर्न मेडिसिन लें. रोग के समूल नाश के लिए निम्न आयुर्वेदिक उपचार लें
1.
योगराज – 250 मिलीग्राम
इच्छाभेदी रस – 125 मिलीग्राम
त्रिफला चूर्ण – 3 ग्राम
गुनगुने पानी से सुबह शाम

2.
मार्कण्ड आदि हिम – 20 मिली.
गुनगुने पानी से सुबह शाम

3.
आरोग्यवर्धनी वटी – 2 गोलियाँ दिन में तीन बार

4.
द्राक्षारिष्ट – 20 मिली समान मात्रा जल से दोनों टाइम खाने के बाद

5.
रात में सोने से पहले
हरिद्रादि घृत 20 मिली, दूध से

एक बहुत ही ख़ास बात
अल्कोहल यानी शराब लीवर के लिए ज़हर की तरह होती है. लीवर का सही काम न करना ही पीलिया का मुख्य कारण होता है. इसलिए अल्कोहल का सेवन बिलकुल न करें.

आप ये सभी दवाइयाँ गो क्यूरेबल पर ऑनलाइन आर्डर द्वारा भी प्राप्त कर सकते हैं.

संग्रहणी रोग पर हमारा उपयोगी आर्टिकल्स यहाँ पढ़ें.

आप अपनी सेहत सम्बन्धी परेशानियाँ हमसे शेयर कर सकते हैं. हमारे ऑनलाइन डॉक्टर्स (online doctors) आपके सवालों के जवाब देंगे.

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