धातु रोग या शुक्रमेह के लिए 2 रामबाण आयुर्वेदिक औषधियां

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शुक्रमेह युवाओं के लिए एक बुरे सपने के समान बीमारी है। इसको अंग्रेज़ी में spermatorrhea कहते हैं। पेशाब करते समय या मूत्र त्याग करते समय चिपचिपा पदार्थ या धातु निकलता है जिसको उर्दू में कतरा आना बोलते हैं।

असल में शुक्रमेह या धातुरोग शारीरिक दुर्बलता की वजह से होता है। यहां पर मै ये साफ कर देना चाहता हूं कि धात आने की वजह से दुर्बलता नहीं होती है बल्कि पहले से दुर्बल शरीर के कारण धातु रोग होता है। अक्सर युवा इस बात को लेकर चिंतित होते हैं कि धात आने से उनको कमजोरी महसूस होती है और उनके चेहरे की रौनक या कांति चली जाती है। ये सिर्फ उनका वेहम होता है।

शुक्रमेह या धातुरोग क्यों होता है।

Causes of spermatorrhea

dhat ane ya dhatu rog ka karan

शरीर में किसी वजह से आयी कमजोरी पेल्विक मांसपेशियां जो पेशाब निकालने को नियंत्रित करती हैं को भी कमजोर के देती है जिसके कारण पेशाब के साथ साथ प्रोस्टेट ग्रंथी में बनने वाला द्रव्य यानी कि शुक्र भी पेशाब के साथ आने लगता है।

शुक्रमेह से होने वाले नुकसान

Harms of shukrmeh

शुक्रमेह का रोगी शीघ्रपतन और नपुंसकता का शिकार हो जाता है। शुक्रमेह से पीड़ित पुरुष संभोग का बिल्कुल भी आनंद नहीं के पाता बल्कि उसको यही चिंता सताती है कि कैसे वो अपनी पत्नी को संतुष्ट कर सके। धातुरोग से पीड़ित व्यक्ति सही समय पर उपचार ना मिलने पर पूरी तरह नपुंसक भी हो सकता है।

शुक्रमेह के उपचार के लिए रामबाण आयुर्वेदिक उपचार

Sureshot ayurvedic treatment for spermatorrhea

dhatu rog ka ramban ayurvedic ilaj

इसका इलाज करने के लिए जरूरी है शारीरिक दुर्बलता और वीर्य के पतलेपन को दूर करना और इसके लिए हर्बल मेडिसिंस, व्यायाम और मालिश की ज़रूरत होती है। नीचे हम सर्वाधिक कारगर आयुर्वेदिक और यूनानी दवाएं बता रहे हैं जिनका शत प्रतिशत परिणाम मिलता है।

धातु पौष्टिक चूर्ण (Dhatu Puashtik Churn)

ये आयुर्वेद का एक अत्यन्त उपयोगी योग है और ऋषि मुनियों के समय से इसको तैयार किया जाता रहा है। ये योग सभी प्रकार की पुरुष यौन समस्याओं ख़ासतौर से धातुरोग या शुक्रमेह का रामबाण उपचार है। धातु पौष्टिक चूर्ण शतावरी, सफ़ेद मूसली, अश्वगंधा, बीज्बंद और बिदारीकंद जैसी ऐसी सभी देसी दवाओं का संतुलित मिश्रण है जो दुर्बल शरीर को शक्ति देता है और वीर्ये को गाढ़ा बनाता है. धातु पौष्टिक चूर्ण वीर्य में शक्राणुओं की संख्या बढाता है और नपुंसकता यानि की लिंग में ढीलेपन को दूर करने में भी सहायक है. ये अद्भुत आयुर्वेदिक दवा किशोरों में होने वाली स्वप्नदोष की अधिकता में भी फायदेमंद है.

धातु पौष्टिक चूर्ण की खुराक (Dosage)

इस चूर्ण या पाउडर को 5 से १० ग्राम दिन में दो बार हलके गर्म दूध के साथ ले सकते हैं.

धातु पौष्टिक चूर्ण घटक (ingredients)

Shatavari, Gokhru Beej, Beejband, Banshlochan, Kabab-chini,Chopchini, Kawanch beej, Safed musli, Kali musli, Sontha,Kali Mirch, Pipal, Salam, Mishri, Vidarikand, Ashwagandha, Nisoth.

धातु पौष्टिक चूर्ण दिन में और रात में किस समय लेना चाहिए

सुबह नाश्ते के बाद और रात में खाना खाने के लगभग एक घंटे बाद ले सकते हैं

धातु पौष्टिक चूर्ण कितने दिन तक लेना चाहिए

धातु पौष्टिक चूर्ण एक सुरक्षित आयुर्वेदिक औषधि है और इसको लम्बे समय तक लिया जा सकता है. इसका अधिक से अधिक लाभ लेने के लिए लगभग ६ महीने तक इसका सेवन करना चाहिए.

क्या धातु पौष्टिक चूर्ण का कोई विकल्प भी है?

Alternatives of Shatu Pushtik Churan

जी हैं धातु पौष्टिक चूर्ण के कुछ बहोत अच्छे विकल्प भी उपलब्ध हैं. अगर किसी वजेह से आपको धातु पौष्टिक चूर्ण उपलब्ध नहीं हो पता है तो आप  सुपारी पाक का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके अलावा शतावरी कल्प भी इसका एक अच्छा अल्टरनेटिव है.

सुपारी पाक (Supari Paak)

ये भी एक धातु पौष्टिक चूर्ण की तरह ही पूर्णतया herbal आयुर्वेदिक दावा है जिसको सुपारी या छाली (betal nut), बला, जायफल, दालचीनी, हरीतकी, आमला, शतावरी, मखाना, गोखरू और दूसरी कई सारी जड़ी बूटियों से तैयार किया जाता है. सुपारी पाक स्त्री और पुरुषों दोनों के लिए उपयोगी है और शारीरिक दुर्बलता को दूर करता है. वज़न बढ़ाता है और वीर्ये को पुष्ट करता है. बॉडी बिल्डिंग के इच्छुक युवक भी बॉडी बनाने के लिए इस औषधि का सेवन कर सकते हैं. कुछ कम्पनियाँ सुपारी पाक में रसायन भी मिला देती हैं तो उसकी कंपनी का सुपारी पाक खरीदें जिसमे रसायन न हो. नीचे दी गयी किसी कंपनी का खरीद सकते हैं.

सुपारी पाक की खुराक और परहेज़

नवयुवक (20 साल से कम के पुरुष) 5 ग्राम दिन में दो बार हलके गर्म दूध के साथ लें और 20 साल से ऊपर के पुरुष १० ग्राम दिन में दो बार. पूर्ण लाभ के लिए कम से कम ६ महीने तक इस्तेमाल करें. मसालेदार और तला भुना खाना न खाएं. अत्यधिक सम्भोग और हस्त्मेथुन से बचें.

Dhootpapeshwar शिलाप्रवंग स्पेशल

धूतपापेश्वर mumbai based आयुर्वेदिक दवा कंपनी है. और इस कंपनी के सभी उत्पाद अपनी गुणवत्ता (quality) के लिए जाने जाते हैं जैसे कि स्वामला के बारे में हम पहले ही बता चुके हैं की कैसे ये दूसरे च्यवनप्राश से कई गुना बेहतर है.

शिलाप्रवंग टेबलेट्स धूतपापेश्वर द्वारा बनाया गया एक बहुत ही खास (very precious) आयुर्वेदिक formula है जो की पुरुष में शारीरिक दुर्बलता को दूर करने और काम शक्ति को बढाने में अत्यंत लाभदायक है.

शिलाप्रवंग जड़ी बूटियों (herbs) जैसे की अश्वगंधा, गोखरू, बला, शतावरी, अकरकरा, जायफल आदि के extract से बनी है ये सभी जड़ी बूटियां पुरुषों की यौन समस्याओं की अचूक दवाईयां हैं और ये नपुंसकता (erectile dysfunction), शीघ्रपतन (Premature ejacultation), शुक्रमेह (spermatorrhea), स्वप्नदोष (nocturnal emission) और मूत्रमार्ग (urinary tract) से सम्बंधित रोगों को दूर करती हैं.

शिलाप्रवंग एक बहुमूल्य आयुर्वेदिक मेडिसिन है जिसमे स्वर्ण भस्म (gold), शिलाजीत, मोती(coral) की भस्म और टिन धातु की भस्म भी सम्मिलित होती है जो ज़बरदस्त कामशक्ति वर्धक (male sex power booster) होती हैं और शारीरिक दुर्बलता (general debility) दूर करती हैं.

शिलाप्रवंग के घटक (ingredients)

Shuddha Shilajit 40 mg, Mouktik Pishti 1 mg Pravala Bhasma 20 mg, Suvarnamakshik Bhasma 20 mg,  Akarkarabh 10 mg, Guduchi Satva 20 mg, Ashwagandha 60 mg, Shatavari 15 mg, Gokshur 15 mg, Balamoola 15 mg, Amalaki 10 mg, Jatiphal 5 mg, Karpoor 5 mg, Latakasturi beej 20 mg, Kraunchbeej 90 mg, Makardhwaj 10 mg, Suvarna Bhasma 1 mg, Vanga Bhasma 20 mg

शिलाप्रवंग की खुराक (dosage)

शिलाप्रवंग की एक या दो गोली दिन में दो बार हलके गर्म दूध के साथ ले सकते हैं. एक स्वस्थ व्यक्ति जिसको गुर्दों और दिल की या कोई और गंभीर बीमारी न हो, शिलाप्रवंग को दो महीने तक इस्तेमाल कर सकता है.

शिलाप्रवंग के साथ क्या परहेज़ करें (prevention)

शिलाप्रवंग के साथ कोई दूसरी ऐसी आयुर्वेदिक दवा नहीं लेनी चाहिए जिसमे वंग या टिन भस्म, मोती भस्म, स्वर्ण भस्म और शिलाजीत हो. मसालेदार और तले भुने खाने से बचना चाहिए.

शुक्रमेह को दूर करने के लिए ये व्यायाम भी करें – पढ़ें ये आर्टिकल

शुक्रमेह को दूर करने के लिए लिंग की मालिश भी करें. पढ़ें ये आर्टिकल

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दवा को इस्तेमाल करने का तरीका, खुराक और समय, Dosage, How to use


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धातु … से सम्बंधित कुछ सवाल जवाब, Questions related to Medicine


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वीर्ये में शुक्राणुओं की संख्या बढाने के घरेलु उपाय

वीर्ये में शुक्राणुओं की संख्या बढाने के घरेलु उपाय

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क्या आप शुक्राणुओं की कमी की वजेह से औलाद का सुख प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं क्या एलोपैथिक इलाज से आपको कोई फायदा नहीं हो पा रहा है? अगर ऐसा है तो परेशान होने की ज़रूरत नहीं है.

सही बात तो ये है कि देसी दवाइयों के इस्तेमाल से sperm count को बढ़ाया जा सकता है और साथ साथ sperms की motility को भी बढ़ाया जा सकता है.

शुक्राणुओं की कमी के कुछ संभव कारण

Low Sperm Count (शुक्राणुओं की कमी) को oligozoospermia कहते हैं और ये बीमारी आजकल काफी कॉमन होती जा रही है. इसकी एक सामान्य सी वजेह वही है जो ज़्यादातर मर्दाना कमजोरियों की वजेह बन सकती है और वो है आधुनिक जीवन शैली.

धुम्रपान, शराब, तनाव, अवसाद, फ़ास्ट फ़ूड का ज्यादा इस्तेमाल, वसायुक्त खाना आदि हमारे शरीर की कार्य प्रणाली को प्रभावित करते हैं जो शारीरिक दुर्बलता को जन्म देती है. और इसका सीधा असर शुक्राणुओं के बनने पर भी पड़ता है. शुक्राणु कम बनते हैं और जो बनते हैं वो कमजोर हो जाते हैं जिससे वो उस गति को प्राप्त नहीं कर पाते जो अंडाणु (egg) तक पहुचने के लिए ज़रूरी होती है. गर्भधारण के लिए कम से कम 20 million यानि कि 20 लाख sperms का योनी में जाना ज़रूरी होता है अगर स्पर्म count इससे नीचे चला जाये तो pregnancy नहीं हो पाती है.

शुक्राणुओं की कमी के कुछ दूसरे कारण –

  • ज़्यादा चुस्त अंडरविअर पहनना.
  • लैपटॉप को जांघों पर रखकर इस्तेमाल करना.
  • ज़्यादा देर तक बाइक या कार की सीट पर बैठे रहना.
  • ज़्यादा देर तक एक ही जगह बैठे रहना.
  • खाने में सेलेनियम (selenium) की कमी आदि.
  • मोटापा (Obesity)

शुक्राणुओं की कमी के घरेलु उपचार

छुआरा या dry dates

छुआरा सुखी हुई खजूर होती है और ये low sperm-count के इलाज के लिए एक बेहेतरीन घरेलु नुस्खा है. छुआरा शारीरिक दुर्बलता को दूर करता है और शरीर के एनर्जी लेवल को बढ़ाता है. आपको रोजाना सुबह शाम 4 छुआरा को लेकर एक गिलास दूध में कम से कम १५ मिनट तक पकाना है और ठंडा करके पी लेना है. शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने के साथ साथ छुआरा शीघ्रपतन और नपुंसकता को दूर करने में भी उपयोगी होता है. चूँकि छुआरा मीठा होता है और इसमें sugar की मात्रा काफी ज्यादा होती है तो मधुमेह में आप इसका सेवन नहीं कर सकते.

dry fruits या मेवे

काजू, बादाम और पिस्ता भी oligospermia के इलाज में काफी मददगार होते हैं और ये जिस्म की अंदरूनी ताक़त को बढ़ा सकते हैं.

गोंद कतीरा Tragacanth gum

गोंद कतीरा Tragacanth gum एक पेड़ से निकलने वाला पदार्थ होता है jo Astragalus प्रजाती के पोधों से निकलता है. ये एक चिपचिपा, गधा, पानी में घुल जाने वाला पदार्थ होता है जिसमे polysaccharides पाए जाते हैं. गोंद कतीरा सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है और कई बिमारियों में इसका इस्तेमाल किया जाता है. स्पर्म count increase करने में भी ये काफी फायदेमंद साबित हो सकता है.

लगभग 5gm Tragacanth gum रात को पानी में भिगोकर रख दें. सुबह तक ये पानी में मुलायम होकर फूल जायेगा. अब इसको पानी से अच्छी तरह धो लें ताकि ये ठीक से साफ़ हो जाये. इसके बाद इसको एक गिलास दूध में मिलकर थोड़ी देर पका लें. अगर आपको मधुमेह की समस्या नहीं है तो आप दूध को मीठा भी कर सकते हैं. ये नुस्खा आपको रोजाना रात को सोने से तीन घंटे पहले लेना है या ये कहिये की सम्भोग करने से तीन घंटे पहले (अगर आप शादीशुदा हैं )

शतावरी या asparagus (Asparagus)

शतावरी का सूखा हुआ पाउडर बाज़ार में उपलब्ध होता है. शतावरी एक जड़ी बूटी है जो न सिर्फ मरदाना ताक़त बढाती है बल्कि शुक्राणुओं के सही तरह बनने और उनकी संख्या बढ़ाने में सहायता करती है. शतावरी की जड़ को दवा के रूप में इस्तेमाल किया जाता है.

5 ग्राम शतावरी पाउडर दिन में दो बार दूध के साथ लिया जा सकता है

दोस्तों ये थे कुछ खास घरेलु देसी नुस्खे जो आपके वीर्ये में शुक्राणुओं की संख्या बढाने में या sperm count बढ़ाने में काफी उपयोगी साबित हो सकते हैं.

अगर आप शुक्राणुओं की कमी या oligospermia से जूझ रहे हैं तो हम आपको सलाह देंगे कि आप एक अच्छे आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह ज़रूर लें. Gocurable.com पर भी आप चाहे तो हमारे कुशल और अनुभवी doctors की सलाह ले सकते हैं.

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दवा को इस्तेमाल करने का तरीका, खुराक और समय, Dosage, How to use


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वीर्य… से सम्बंधित कुछ सवाल जवाब, Questions related to Medicine


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पुरुषों में शुक्राणुओं की कमी का आयुर्वेदिक उपचार / Ayurvedic And Herbal Treatment For Low Sperm Count (Oligospermia)

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पुरुषों में शुक्राणुओं की कमी (Oligospermia)

आधुनिक जीवन शैली हमारी सेहत को घुन की तरह खा रही है. आजकल की भागदौड़ की ज़िन्दगी में आदमी को सेहत तब याद आती है जब वो किसी गंभीर बीमारी में फँस चुका होता है.
ऐसी ही एक परेशानी है: पुरुषों में शुक्राणुओं (sperms) की संख्या में कमी. इसे अंग्रेजी में ओलिगोज़ूस्परमिआ (oligozoospermia) या ओलिगोस्पर्मिआ (oligospermia) कहते हैं.
शुक्राणुओं की कमी की वजह से बच्चा न हो पाना यानि निसंतान रह जाना (infertility) आजकल एक आम सी बात हो गयी है.

तो आज के इस आर्टिकल में हम पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या में कमी की वजह जानेंगे और फिर इसका सरल आयुर्वेदिक हर्बल इलाज आपको बताएँगे.

वीर्य और शुक्राणु (Semen And Sperms):

सम्भोग (intercourse) के समय जो द्रव लिंग से निकलता है वह वीर्य है. वीर्य में शुक्राणु होते हैं. एक तंदुरुस्त लड़का एक बार में लगभग 2 से 5 मिली. वीर्य निकालता है. वीर्य के 1 मिली. में औसतन 100 मिलियन शुक्राणु होते हैं.
वीर्य जब औरत की योनि (vagina) में गिरता है तो ये सभी शुक्राणु वहाँ पहले से मौजूद ओवम (ovum=अंडा) की  तरफ दौड़ते हैं लेकिन सिर्फ एक शुक्राणु अंडे से मिल पता है, बाक़ी सभी शुक्राणु योनि के अंदर ही मर जाते हैं. इस तरह एक शुक्राणु और अंडे के मिलने से बच्चा (embryo) बनना शुरू हो जाता है.

यानि एक शुक्राणु + एक अंडा = बच्चा .


अब आप सोच रहे होंगे कि अगर सिर्फ एक ही शुक्राणु चाहिए बच्चा बनने के लिए तो फिर लाखों, करोड़ों शुक्राणुओं की क्या ज़रुरत है?
ज़रुरत है : क्योंकि जितने ज़्यादा शुक्राणु होंगे, उतना ही शुक्राणु के अंडे तक ज़िंदा पहुँच जाने के चान्सेस बढ़ जायेंगे.
वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या कम होने पर पुरुष के संतान पैदा करने के चान्सेस (chances) कम होते चले जाते हैं. और अगर यही संख्या गिरकर 20 मिलियन प्रति मिली. से नीचे चली जाती है तो इसे ओलिगोस्पर्मिआ (oligospermia)  कहा जाता है और संतान उत्पन्न करने के चान्सेस बहुत कम रह जाते हैं.

ओलिगोस्पर्मिआ के मुख्य कारण (Causes of Oligospermia) :

  •  ज़्यादा चुस्त अंडरविअर पहनना.
  • लैपटॉप को जांघों पर रखकर इस्तेमाल करना.
  • ज़्यादा देर तक बाइक या कार की सीट पर बैठे रहना.
  • ज़्यादा देर तक एक ही जगह बैठे रहना.
  • खाने में सेलेनियम (selenium)  की कमी आदि.
  • मोटापा (Obesity)

 

ओलिगोस्पर्मिआ का आयुर्वेदिक उपचार

(Ayurvedic and Herbal Treatment for Oligospermia):

ओलिगोस्पर्मिआ पूरी तरह से दूर किया जा सकता है और वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाई जा सकती है. इसका सबसे सफल इलाज है:

धातुपौष्टिक चूर्ण.

धातुपौष्टिक चूर्ण बनाने का तरीका:

  • गोखरू बीज, सफ़ेद और काली मूसली, शतावरी, कबाब चीनी, विदारीकंद, वंशलोचन, सोंठ, बीजबंद, शतावरी, चोपचीनी, अश्वगंधा, काली मिर्च, सालम मिश्री प्रत्येक 12 ग्राम
  • निशोथ 70 ग्राम
  • मिश्री 250 ग्राम.

इन सभी को साथ पीस लें और सुबह शाम  3-3 ग्राम दूध की साथ लें.

दोस्तों ऊपर दी गयी जानकारी सिर्फ आपकी जागरूकता के लिए है. आप इन सभी का इस्तेमाल आयुर्वेदिक डॉक्टर के परामर्श से एवं दिशानिर्देशन में ही करें. आप गो-क्यूरेबल की टीम से भी अपनी परेशानी शेयर कर सकते हैं और हमारे अपने प्रोडक्ट धातुपौष्टिक चूर्ण जोकि मानकताओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है से लाभान्वित हो सकते हैं.

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