साइनसाइटिस और सिर दर्द : कारण और आयुर्वेदिक उपचार / Ayurvedic Treatment For Sinusitis And Headache

साइनसाइटिस और सिर दर्द : कारण और आयुर्वेदिक उपचार / Ayurvedic Treatment For Sinusitis And Headache

Brand
Used in following diseases –
Top benefits – 

साइनसाइटिस: कारण और आयुर्वेदिक उपचार

दोस्तों आज के लेख में हम साइनसाइटिस (Sinusitis) की चर्चा करेंगे.
साइनसाइटिस क्या है, क्यों होता है और इसका आयुर्वेदिक उपचार क्या है?

साइनसाइटिस (Sinusitis) क्या है:
साइनसाइटिस एक बहुत ही आम समस्या है और सर्दी के दिनों में इसका प्रकोप अधिक देखने को मिलता है.

साइनसाइटिस के लक्षण:
(Symptoms of sinusitis):

नाक के दोनों तरफ या माथे में या सिर के बीच में माथे के पीछे की तरफ दर्द, कभी कभी दर्द काफी बढ़ जाता है,
सर्दी या ठंडी चीज़ों के इस्तेमाल से दर्द बढ़ जाता है. ठंडी हवा से भी दर्द बढ़ता है. सिर में भारीपन आदि.

साइनसाइटिस क्यों होता है, आओ जानें:
(Causes):

दोस्तों हमारी नाक के चारों ओर निम्नलिखित हड्डियाँ होती हैं:
माथे की हड्डी यानि फ्रंटल (Frontal) हड्डी, नाक के दोनों ओर मैक्सिला (Maxilla) नामक हड्डियाँ, नाक के पीछे की तरफ एथमोइड (Ethmoid) और स्फेनोइड (Sphenoid) हड्डियाँ. ये चारों हड्डियाँ नाक को दोनों ओर से, ऊपर से और पीछे से घेरे रहती हैं. ये हड्डियाँ अंदर से खोखली होती हैं और इनके खोखले स्थानों को साइनस (Sinus) बोलते हैं. ये साइनस छोटी नलिकाओं के ज़रिये नाक के अंदर खुलते हैं. सामन्य अवस्था में इन हड्डियों के अंदर हवा भरी रहती हैं. लेकिन कभी कभी इन हड्डियों में से कुछ की नलिकाएँ बंद हो जाती हैं और उनके साइनस में द्रव इकठ्ठा होकर सड़ने लगता है, इसी अवस्था को साइनसाइटिस कहते हैं. साइनसाइटिस में अगर माथे की हड्डी की नलिका बंद होकर उसके अंदर द्रव सड़ता हैं तो माथे में दर्द होता हैं, इसी प्रकार जिस हड्डी का साइनस संक्रमित होता हैं उसी हड्डी की जगह दर्द होता हैं.

साइनसाइटिस का आयुर्वेदिक उपचार:
(Ayurvedic treatment for sinusitis):

आयुर्वेद में साइनसाइटिस को शिरो रोग एवं वातकफ जन्य रोग माना गया हैं और इसकी बहुत ही उपयुक्त चिकित्सा सुझाई गयी हैं.
१. षडबिन्दु तेल
२. गोजिह्वादि क्वाथ

 

प्रयोग कैसे करें:
(How to use):
गोजिह्वादि क्वाथ और षडबिन्दु तेल आप घर पर भी बना सकते हैं या फिर बाजार से झंडू, बैद्यनाथ आदि कंपनियों का भी ले सकते हैं. घर पर षडबिन्दु तेल और गोजिह्वादि क्वाथ कैसे बनाते हैं, इसके लिए हमारे इस विषय पर लेख पढ़ें. जब आप दोनों औषधियाँ ले चुकें या बना चुकें तो गोजिह्वादि क्वाथ को 1 गिलास पानी में डालकर बहुत हलकी आंच पर गरम होने के लिए रख दीजिये. जब इसमें से भाप निकलने लगे तो सुरक्षित दूरी पर रहकर ताकि भाप चेहरे को नुक्सान न पहुँचाए सांस खींचिए ताकि भाप बंद नलिकाओं को खोल दे. लगभग 15 से 25 मिनट तक ऐसा करें. उसके बाद आप 5 बूँद षडबिन्दु तेल नाक में दोनों तरफ डालें और आधे घंटे तक लेटे रहें. ऐसा प्रतिदिन करें जब तक आपका दर्द पूरी तरह समाप्त न हो जाए.
आवश्यक रूप से आपको लाभ होगा.

अपथ्य: ठन्डे खाद्य पदार्थ, ठंडा पानी, हवा विशेषकर ठंडी हवा में अधिक देर तक रहना.

दो बातें गोजिह्वादि क्वाथ और षडबिन्दु तेल के बारे में:
गोजिह्वादि क्वाथ: यह विभिन्न प्रकार की जड़ी बूटियों का मिश्रण होता है जो बाजार से कच्चे रूप में भी मिल सकता है और पाउडर के रूप में भी.
षडबिन्दु तेल : इसमें भी भृंगराज, तगर आदि औषधियाँ होती हैं. षडबिन्दु तेल इन औषधियों का शास्त्रीय मिश्रण है :

(एरण्डमूलं तगरं शताह्वा जीवन्ती रास्ना सहसैन्धवञ्च ।
भृङ्गं विडङ्गं मधुयष्टिका च विश्वौषधं कृष्णतिलस्य तैलम् ।
आजं पयस्तैलविमिश्रितं च चक्षुर्बाह्वोबलं चाप्यधिकं ददाति ॥)
षडबिन्दु तेल साइनसाइटिस के अलावा भी कई शिरो रोगों में लाभकारी है.

दोस्तों आपको हमारी जानकारी कैसी लगी? अपने विचार हमसे शेयर कीजिये. अगर आप किसी भी विषय में कुछ पूछना चाहते हैं तो हमसे कांटेक्ट कीजिये या हमें लिखिए.

[types field=’ingredients’][/types]

दवा को इस्तेमाल करने का तरीका, खुराक और समय, Dosage, How to use


[types field=’dosage-how-to-use’][/types]

साइनस… से सम्बंधित कुछ सवाल जवाब, Questions related to Medicine


[types field=’important-question-answers’][/types]

सवाल पूछें – Ask Question

Contact Us
First
Last
[toc]

Other related useful content on our website

Product Tags